धैर्य

भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश

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भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश

धैर्य

लालसा रखें, जल्दबाज़ी छोड़ें। बीज को देखभाल चाहिए, पर उसे खींचकर जल्दी बड़ा नहीं किया जा सकता।

पुस्तक पढ़ें3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश

यह अध्याय क्या कहता है

ध्यान में अधीरता अक्सर गहरी चाहत के साथ मिल जाती है। पुस्तक दोनों में फर्क करती है: चाहत में दिशा हो सकती है, अधीरता में मांग और संघर्ष जुड़ जाता है।

पुस्तक का रूपक

बीज की उपमा कहती है—बोना, पानी देना और मिट्टी तैयार करना आपके हाथ में है; फूल कब खुलेगा, उसे आदेश नहीं दिया जा सकता।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

अभ्यास नियमित रखें और परिणाम को समय दें। हर दिन जड़ खोदकर देखने से पौधा नहीं बढ़ता; उसी तरह हर सत्र को मापना साधना को तनाव बना सकता है।

जब अधीरता आए
  1. अभ्यास छोड़ें नहीं, पर परिणाम की समय-सीमा थोड़ी ढीली करें।
  2. देखें क्या आप अनुभव को मजबूर कर रहे हैं।
  3. आज केवल सही परिस्थितियाँ तैयार करें—बाकी को समय दें।