भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश
परिणाम मत खोजें
जब अभ्यास लगातार पूछता है 'मुझे इससे क्या मिलेगा?' तब ध्यान मन का एक और सौदा बन जाता है।
यह अध्याय क्या कहता है
मन परिणाम, उपलब्धि और शॉर्टकट चाहता है। वह क्रिया से कम और उससे मिलने वाली चीज़ से अधिक जुड़ा रहता है।
पुस्तक की दिशा
पुस्तक ध्यान को लक्ष्यहीन उपस्थिति की दिशा में ले जाती है। अभ्यास पूरी तरह करें, पर हर सत्र को लाभ-हानि की परीक्षा न बनाएँ।
अभ्यास के लिए इसका अर्थ
परिणाम न चाहने का अर्थ उदासीनता नहीं। इसका अर्थ है प्रक्रिया में पूर्ण होना और फल को नियंत्रित करने की बेचैनी छोड़ना।
अभ्यास के बाद
- तुरंत न पूछें: “आज क्या मिला?”
- कुछ मिनट शरीर, मन और संवेदना को वैसे ही रहने दें।
- परिवर्तन को दिनों और जीवन की गुणवत्ता में देखें, हर सत्र की उपलब्धि में नहीं।