खेल-भाव

भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश

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भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश

खेल-भाव

ध्यान को भारी कर्तव्य बना देने से मन बंद हो जाता है। पुस्तक खेल, उत्सव और विश्राम पर जोर देती है।

पुस्तक पढ़ें3. मुक्ति के लिए दिशानिर्देश

यह अध्याय क्या कहता है

गंभीर चेहरा आध्यात्मिकता का प्रमाण नहीं। अत्यधिक गंभीरता अक्सर भय, उपलब्धि और नियंत्रण को मजबूत करती है।

पुस्तक का शब्द

पुस्तक “लीला”—खेल—की गुणवत्ता की ओर इशारा करती है। खेल में व्यक्ति उपस्थित होता है, पर लगातार परिणाम की चिंता नहीं करता।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

विधि को ईमानदारी से करें, पर भीतर थोड़ा हल्कापन रखें। यदि गलती हो जाए तो उसे सीखने का हिस्सा मानें, परीक्षा में असफलता नहीं।

अभ्यास-स्मरण
  1. आज एक विधि को “प्रयोग” की तरह करें, परीक्षा की तरह नहीं।
  2. शरीर और मन को अनावश्यक कठोरता से मुक्त रखें।
  3. अंत में देखें: क्या आप थोड़ा अधिक जीवंत और खुले हैं?