पहाड़ी पर बैठा साक्षी

भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 3. पहाड़ी पर साक्षी

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भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 3. पहाड़ी पर साक्षी

पहाड़ी पर बैठा साक्षी

यदि लगता है कि आप न पूरी तरह संसार में हैं, न अभी “पहाड़ी पर साक्षी” बने हैं, पुस्तक का उत्तर आश्चर्यजनक है: शायद यही सही जगह है।

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प्रश्न क्या है?

प्रश्नकर्ता स्वयं को बीच में महसूस करता है—न पुरानी दुनिया में पूर्ण, न किसी ऊँचे साक्षी-स्थान पर स्थिर।

उत्तर का मुख्य मोड़

उत्तर इस “बीच” को समस्या नहीं मानता। पुरानी पहचान ढीली हो रही है और नई कोई ठोस पहचान बनानी भी नहीं; यह संक्रमण जागरूकता के लिए उपजाऊ है।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

जल्दी से किसी आदर्श अवस्था पर चढ़ने की कोशिश न करें। जहाँ हैं वहीं से शरीर, विचार और संबंधों को देखें; “बीच में होना” भी देखा जा सकता है।

पहले कहीं और जाने की कोशिश रोकें
  1. आज अपनी वर्तमान अवस्था को गलत घोषित न करें।
  2. देखें कि कौन-सा पुराना आधार छूट रहा है और किस नए आदर्श को पकड़ना चाहते हैं।
  3. कुछ समय इस अनिश्चित मध्य-स्थान में सजग रहें।