आपने अपनी साइकिल कहाँ छोड़ी?

भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 4. आपने अपनी साइकिल कहाँ छोड़ी?

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भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 4. आपने अपनी साइकिल कहाँ छोड़ी?

आपने अपनी साइकिल कहाँ छोड़ी?

तेज़ भागता मन शत्रु नहीं है। एक साथ एक्सेलेरेटर और ब्रेक दबाने के बजाय देखें कि मन कहाँ जाता है और उसे क्या चला रहा है।

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प्रश्न क्या है?

प्रश्नकर्ता कहता है कि ध्यान में मन बहुत तेज़ चलता है, मौन टिकता नहीं और साक्षीभाव बिजली की चमक जितना छोटा है; उसे लगता है शायद समय व्यर्थ जा रहा है।

पुस्तक की कथा

पुस्तक की हास्य-कथा में एक पादरी अपनी साइकिल भूल जाता है और दूसरों पर शक करता है; एक वाक्य सुनते ही उसे याद आता है कि साइकिल कहाँ छोड़ी थी। संकेत यह है कि मन की दौड़ की जड़ होती है—उसे समझना उसे हिंसक रूप से रोकने से अधिक उपयोगी है।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

मन की बुद्धि को मौन के नाम पर कुचलें नहीं। उसकी दिशा, इच्छा और आदतों को देखें। कुछ सेकंड की साफ़ साक्षी-दृष्टि भी व्यर्थ नहीं; वही क्षण धीरे-धीरे जुड़ते हैं।

एक साथ एक्सेलेरेटर और ब्रेक न दबाएँ
  1. मन तेज़ हो तो तुरंत उसे रुकने का आदेश न दें।
  2. देखें वह बार-बार कहाँ जाता है—योजना, भय, इच्छा, पैसा, विवाद या निर्णय?
  3. कुछ सेकंड स्पष्ट देख पाएँ तो उसे असफलता नहीं, साक्षीभाव की शुरुआत मानें।