भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 1. विधियाँ और ध्यान
विधि को कब छोड़ें
विधि नदी पार करने की नाव है: जब जरूरत हो उपयोग करें, और सचमुच दूसरे तट पर पहुँचने के बाद नाव सिर पर उठाकर न चलें।
यह अध्याय क्या कहता है
विधि तब तक उपयोगी है जब तक वह आपको जागरूकता तक पहुँचने में सहारा देती है। खतरा तब है जब साधन ही पहचान और लक्ष्य बन जाए।
पुस्तक की कथा
पुस्तक नाव की कहानी देती है—कुछ लोग नदी पार करने के बाद कृतज्ञता में नाव सिर पर उठाकर चलने लगते हैं। मददगार साधन अब बोझ बन गया।
अभ्यास के लिए इसका अर्थ
शांति का स्पष्ट क्षण आए तो उस क्षण विधि को छोड़कर बस रहें। बाद में मन लौटे तो विधि फिर उपयोगी हो सकती है; छोड़ना अहंकारी घोषणा नहीं, संवेदनशीलता है।
क्षण को पहचानें
- अभ्यास करते समय देखें कब विधि सहारा है और कब अतिरिक्त गतिविधि बन रही है।
- सच्ची स्थिरता आए तो कुछ समय तकनीक किए बिना बस रहें।
- फिर जरूरत हो तो विधि पर लौटें; उसे पकड़कर पहचान न बनाएँ।