कल्पना मदद कर सकती है

भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 1. विधियाँ और ध्यान

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भाग दो · ध्यान का विज्ञान · 1. विधियाँ और ध्यान

कल्पना मदद कर सकती है

पुस्तक कल्पना को वास्तविक मनोवैज्ञानिक क्षमता मानती है। वह विधि का हिस्सा बन सकती है, पर उसे अंतिम सत्य समझना भूल होगी।

पुस्तक पढ़ें1. विधियाँ और ध्यान

यह अध्याय क्या कहता है

कल्पना केवल “झूठ” नहीं; वह शरीर और मन की दशा को प्रभावित करने वाली शक्ति है। इसलिए कई ध्यान विधियाँ प्रकाश, ऊर्जा या आंतरिक चित्रों का उपयोग करती हैं।

पुस्तक का उदाहरण

तिब्बती ऊष्मा-अभ्यास का उदाहरण दिखाता है कि गहरी कल्पना शरीर पर प्रभाव डाल सकती है। इससे उसकी क्षमता सिद्ध होती है, अंतिम वास्तविकता नहीं।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

कल्पना को सीढ़ी की तरह उपयोग करें। उससे संवेदनशीलता और एकाग्रता बन सकती है, पर अंततः यह भी देखा जाने वाला अनुभव है—साक्षी उससे परे है।

उपयोग का सिद्धांत
  1. जिस विधि में कल्पना दी गई हो, उसे स्पष्ट रूप से समझकर करें।
  2. चित्र को जबरन वास्तविक बनाने की कोशिश न करें।
  3. याद रखें: कल्पना सहारा है; देखने वाला उससे भी अधिक मूल है।