बस 180 डिग्री का मोड़

भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 5. बस 180 डिग्री का मोड़

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भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 5. बस 180 डिग्री का मोड़

बस 180 डिग्री का मोड़

'कभी साक्षी हूँ, कभी नहीं'—यह बदलती अवस्था भी किसी अधिक निरंतर चीज़ द्वारा देखी जा रही है। पुस्तक इसे 180 डिग्री मुड़ने जैसा बताती है।

पुस्तक पढ़ें5. बस 180 डिग्री का मोड़

प्रश्न क्या है?

प्रश्नकर्ता जागरूकता के आने-जाने से भ्रमित है और स्थायी अवस्था चाहता है।

उत्तर का मुख्य मोड़

उत्तर अनुभव की ओर नहीं, अनुभव को जानने वाले की ओर मोड़ता है। “मैं सजग हूँ/नहीं हूँ” दोनों कथन दिखाई दे रहे हैं; उन्हें कौन जान रहा है?

पुस्तक की छवि

आईने की छवि की तरह, ध्यान दिशा बदलना है—बाहर के प्रतिबिंब से उस स्पष्टता की ओर जो हमेशा से प्रतिबिंब संभव बनाती रही।

अवस्था से उसे देखने वाले की ओर मुड़ें
  1. आज “मैं अभी जागरूक नहीं” विचार आए तो उसे भी देखें।
  2. स्थिति बदलने से पहले पूछें: यह परिवर्तन किसे दिखाई दे रहा है?
  3. उत्तर बनाने के बजाय कुछ क्षण उसी देखने में ठहरें।