तथाता ध्यान

प्रतिरोध न करें; सबको जैसा है वैसा रहने दें

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निष्क्रिय ध्यान · तथाता

तथाता ध्यान

यह पूर्ण छोड़ देने का अभ्यास है: जीवन से न लड़ें और अनुभव को तुरंत बदलने की जल्दी न करें। समर्पण, विलय और पूर्ण स्वीकृति को खोजते हुए जागते रहें।

निष्क्रिय ध्यानछोड़ देनामूल: तथाता / साक्षीभाव
इस ध्यान को कैसे शुरू करें?

पहले सभी चरण एक बार पढ़ लें। वास्तविक ध्यान के समय अभ्यास ऑडियो चलाएँ; इंटरनेट के बिना अभ्यास करना हो तो पहले फोन में डाउनलोड कर लें।

अभ्यास की शैली

चरण 1

पत्ते की तरह बहें

आँखें बंद करें और पूरी तरह शिथिल हों। एक तेज़ नदी की कल्पना करें; उसमें उतरें पर तैरें नहीं—सूखे पत्ते की तरह बहते जाएँ। नियंत्रण न करने की अनुभूति को जानें।

चरण 2

पुरानी पहचान को घुलने दें

शिथिलता जारी रखें। मृत्यु और दाह-संस्कार की प्रतीकात्मक छवियों के माध्यम से देखें कि शरीर और परिचित 'मैं' भी विलीन हो सकते हैं। उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, स्वयं को पकड़े न रहने का अनुभव करना है।

चरण 3

तथाता—जैसापन—का अनुभव

ध्वनियाँ, शरीर की संवेदनाएँ, विचार और वातावरण जैसे हैं वैसे ही रहें। इस क्षण से अलग होने की मांग न करें। कोई प्रतिरोध नहीं—केवल जागरूकता।

चरण 4

वर्तमान में लौटें

कुछ देर शांत रहें, कुछ धीमी श्वास लें और आँखें खोलें। रात में किया हो तो इसके बाद सीधे सो सकते हैं।

तथाता निष्क्रियता नहीं है
इसका अर्थ जागरूकता छोड़ना नहीं, बल्कि भीतर का प्रतिरोध छोड़ना है। स्वीकार के साथ साक्षीभाव बना रहता है।

ध्यान शुरू करें · अभ्यास ऑडियो

इसे वास्तविक अभ्यास के दौरान उपयोग करें। ऑडियो को पूरी प्रक्रिया का समय और क्रम संभालने दें ताकि फोन बार-बार न देखना पड़े।