रात्रि ध्यान

शरीर, श्वास और विचार को शिथिल करें; केवल साक्षीभाव रहने दें

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निष्क्रिय ध्यान · रात्रि ध्यान

रात्रि ध्यान

रात्रि ध्यान धीरे-धीरे शरीर, श्वास और विचार पर आपकी पकड़ ढीली करता है। तीनों शांत हों तो नींद या किसी विशेष अनुभव के पीछे न जाएँ; केवल देखने की छोटी, स्पष्ट लौ रहने दें।

निष्क्रिय ध्यानसोने से पहले / रात्रिमूल: विश्राम और साक्षीभाव
इस ध्यान को कैसे शुरू करें?

पहले सभी चरण एक बार पढ़ लें। वास्तविक ध्यान के समय अभ्यास ऑडियो चलाएँ; इंटरनेट के बिना अभ्यास करना हो तो पहले फोन में डाउनलोड कर लें।

अभ्यास की शैली

चरण 1

शरीर को शिथिल करें

आँखें बंद करके बैठें और शरीर को स्वाभाविक रूप से छोड़ने दें। मुद्रा पर नियंत्रण धीरे-धीरे कम करें और शरीर को जितना संभव हो उतना गहरा विश्राम दें।

चरण 2

श्वास को शिथिल करें

लय को नियंत्रित न करें। श्वास को शांत और सूक्ष्म होते महसूस करें; बस जानें कि श्वास हो रही है।

चरण 3

विचार को शिथिल करें

विचार आएँ तो न उनका पीछा करें, न दबाएँ। भीतर हटें और सोच को स्वयं धीमा होने दें।

चरण 4

केवल देखना रहने दें

मौन में रहें। शरीर, श्वास और विचार—ये सब देखी जाने वाली वस्तुएँ हैं; जागरूकता छोटी दीप-ज्योति की तरह प्रकाशित रहे।

दिशा फिर भी साक्षीभाव ही है
निष्क्रिय का अर्थ सुस्ती या विचारों को दबाना नहीं। शरीर, श्वास, ध्वनि और विचार जैसे हैं वैसे आने दें और जागरूक रहें।

ध्यान शुरू करें · अभ्यास ऑडियो

इसे वास्तविक अभ्यास के दौरान उपयोग करें। ऑडियो को पूरी प्रक्रिया का समय और क्रम संभालने दें ताकि फोन बार-बार न देखना पड़े।