भाग तीन · अध्याय 16 · मृत्यु में प्रवेश
मृत्यु का उत्सव मनाएँ
पुस्तक बताती है कि जब जीवन सचमुच जिया जाता है तो मृत्यु केवल आपदा नहीं रह जाती। अभ्यास यह है कि जीने और मिटने—दोनों को साक्षीभाव में शामिल किया जाए।
अभ्यास की शैली
- आज जो कुछ समाप्त हो चुका है, उसे शांत होकर याद करें।
- देखें कि हर समाप्ति किसी नए आरंभ के लिए जगह छोड़ती है।
- कोई निष्कर्ष न निकालें; “समाप्त होना” भी देखे जाने वाली घटना बने।
साक्षीभाव न खोएँ
विधि केवल प्रवेश-द्वार है। चाहे उसमें श्वास, नृत्य, ध्वनि, अंधकार, बैठना या संबंध शामिल हो—मुख्य बात किसी अनुभव का पीछा करने के बजाय जो घट रहा है उसे धीरे-धीरे स्पष्ट देखना है।
विधि केवल प्रवेश-द्वार है। चाहे उसमें श्वास, नृत्य, ध्वनि, अंधकार, बैठना या संबंध शामिल हो—मुख्य बात किसी अनुभव का पीछा करने के बजाय जो घट रहा है उसे धीरे-धीरे स्पष्ट देखना है।