अनिश्चितता के साथ तालमेल

भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 8. अनिश्चितता के साथ तालमेल

← इस भाग पर वापस जाएँ
भाग पाँच · गुरु से प्रश्न · 8. अनिश्चितता के साथ तालमेल

अनिश्चितता के साथ तालमेल

पुराना अहंकार ढीला पड़ता है तो जीवन के परिचित नियम भी काम करना बंद कर सकते हैं। पुस्तक इस अपरिचितता और अनिश्चितता को भीतरी यात्रा का महत्वपूर्ण संक्रमण मानती है।

पुस्तक पढ़ें8. अनिश्चितता के साथ तालमेल

प्रश्न क्या है?

प्रश्नकर्ता कहता है कि स्वयं को अधिक देखने पर पुरानी पहचान झूठी लगने लगी है, पर नई निश्चित पहचान न मिलने से बेचैनी होती है।

उत्तर का मुख्य मोड़

उत्तर कहता है कि पुराने नक्शे का टूटना हमेशा समस्या नहीं। यदि तुरंत नई पहचान बना ली तो वही कारागार नए नाम से लौट आएगा।

पुस्तक के तीन चरण

यात्रा में पहले पुरानी निश्चितता टूटती है, फिर कुछ समय अज्ञात का खुला क्षेत्र आता है, और धीरे-धीरे अधिक वास्तविक केंद्र उभरता है। बीच का चरण धैर्य मांगता है।

पुराने नक्शे के बिना चलना सीखें
  1. हर अनिश्चितता को तुरंत निर्णय से बंद न करें।
  2. पुराने नियम के टूटने पर देखें कि डर क्या कह रहा है।
  3. छोटे दैनिक कामों में सरलता बनाए रखें और भीतरी प्रश्न को समय दें।