ध्यान एकाग्रता नहीं है

भाग चार · ध्यान की बाधाएँ · 2. गलत विधियाँ

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भाग चार · ध्यान की बाधाएँ · 2. गलत विधियाँ

ध्यान एकाग्रता नहीं है

एकाग्रता जागरूकता को एक बिंदु तक सीमित करती है; ध्यान समग्रता के प्रति खुलता है। एक में तनाव हो सकता है, दूसरे की शुरुआत विश्राम और स्वीकार से होती है।

पुस्तक पढ़ें2. गलत विधियाँ

यह अध्याय क्या कहता है

एकाग्रता में बाकी सबको हटाकर एक वस्तु पकड़ी जाती है। अध्ययन या काम में यह उपयोगी हो सकती है, पर पुस्तक इसे ध्यान के समान नहीं मानती।

पुस्तक में तुलना

ध्यान में पक्षियों की आवाज़, शरीर, विचार और श्वास—सब उपस्थित हो सकते हैं। आप किसी एक वस्तु को पकड़कर बाकी अस्तित्व से दीवार नहीं बनाते।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

यदि अभ्यास संकुचन, सिर-दर्द या “हर कीमत पर ध्यान टिकाने” का संघर्ष बन रहा है, थोड़ा खुलें। देखें बिना दबाए, सुनें बिना चुनते हुए।

संकुचित नहीं, खुले
  1. एक ध्वनि चुनकर बाकी सब हटाने के बजाय पूरे ध्वनि-क्षेत्र को सुनें।
  2. श्वास देखें, पर अन्य संवेदनाएँ आएँ तो उन्हें दुश्मन न बनाएँ।
  3. विश्राम को ध्यान की शुरुआत मानें।