करुणा

भाग एक · ध्यान के बारे में · 2. ध्यान का खिलना

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भाग एक · ध्यान के बारे में · 2. ध्यान का खिलना

करुणा

पुस्तक की भाषा में करुणा वह गुण है जो प्रेम और ध्यान के मिलने पर जन्मता है।

पुस्तक पढ़ें2. ध्यान का खिलना

यह अध्याय क्या कहता है

यहाँ प्रेम केवल जरूरत, इच्छा या बदले की अपेक्षा नहीं रहता; वह बाँटने की दिशा में बदलता है। ध्यान जुड़ने पर यह बाँटना केवल भावुकता नहीं, जागरूकता से आता है।

पुस्तक में तुलना

पुस्तक भिखारी और सम्राट की छवि देती है: भिखारी जैसा प्रेम कहता है “मुझे दो”; भरपूर प्रेम इसलिए देता है क्योंकि भीतर पहले से बहुत कुछ है।

अभ्यास के लिए इसका अर्थ

यह कार्ड आपको “अच्छा व्यक्ति” बनने का अभिनय नहीं सिखाता। बस देखें कि देने में छिपा हिसाब है या नहीं; साफ़ देखना ही साधना का हिस्सा है।

पठन-स्मरण
  1. अपने ऊपर “करुणामय” बनने का दबाव न डालें।
  2. जरूरत, अपेक्षा और देने के संबंध को ईमानदारी से देखें; स्पष्टता स्वयं ध्यान है।